मोदी सरकार में जल्द बड़ा फेरबदल, युवाओं को मिल सकता है मौका
Modi Cabinet Reshuffle
नई दिल्ली: Modi Cabinet Reshuffle: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के नेतृत्व में संगठनात्मक फेरबदल तेज होने के बाद अब केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल में फेरबदल (Cabinet Reshuffle) की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं. सूत्रों के अनुसार, संगठन में नई टीम गठन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में मिड-टर्म रीसेट करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें युवा चेहरों को तरजीह और कार्यक्षमता में कमजोर मंत्रियों की समीक्षा होगी.
नितिन नबीन ( 2026 में भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष बने हैं. उनकी नियुक्ति के साथ पार्टी में जनरेशनल शिफ्ट शुरू हो चुका है, जो अब सरकार तक फैलने वाला है. 4 मई के आसपास जब राज्यों के चुनाव नतीजे आ जाएंगे उसके बाद यह प्रक्रिया और गति पकड़ सकती है.
सूत्रों की माने तो 4 मई के बाद भाजपा संगठन और उसके बाद केंद्रीय कैबिनेट में भी जल्दी ही काफी फेरबदल और बदलाव देखे जा सकतें हैं. अंदरखाने पार्टी सूत्रों के मुताबिक पार्टी आलाकमान इस बार के फेरबदल (Reshuffle) को लेकर प्रमुख मानदंड तैयार कर रही है. साथ ही पार्टी सूत्रों की माने तो केंद्रीय कैबिनेट फेरबदल के लिए भी कुछ मानदंड तैयार किए गए हैं
पार्टी और सरकार के सूत्रों के अनुसार, फेरबदल में जिन प्रमुख मानदंडों का इस बार ध्यान रखा जाएगा वो इस प्रकार से हैं:
मुख्य तौर पर बदलाव में इस बार जनरेशनल शिफ्ट और युवा चेहरे पर ध्यान दिया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक संगठन की तरह ही कैबिनेट में भी 40 से 50 वर्ष के युवा नेताओं को मौका दिये जाने की बात है. कई वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, जबकि नए चेहरे सरकार में लाए जा सकते हैं.
इसके लिए परफॉर्मेंस आधारित मूल्यांकन किए जाएंगे. जिसके तहत कम प्रदर्शन वाले मंत्रियों की जगह सक्रिय और प्रभावी नेताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है. आर्थिक चुनौतियों और 2029 चुनावों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालयों का भी रीकैलिब्रेशन किया जा सकता है.
इसके अलावा पार्टी सूत्रों के मुताबिक, सरकार और संगठन दोनों में ही इस बात का खास ध्यान रखा जाएगा कि क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को परस्पर जगह मिल पाए. इसके तहत विभिन्न राज्यों (खासकर पूर्वी और दक्षिण भारत), ओबीसी, एसी/एसटी, महिला और अल्पसंख्यक वर्गों का बेहतर प्रतिनिधित्व हो. पार्टी इस बात का भी ध्यान रख रही कि बिहार से नए अध्यक्ष नितिन नबीन के प्रभाव से पूर्वी भारत को और मजबूती मिले.
अंदरखाने इस बात को लेकर लगातार पार्टी और सरकार के बीच मंथन चलता रहा है कि, संगठन-सरकार समन्वय का पूरा पूरा ध्यान रखा जाए. इस बात को लेकर उत्तर प्रदेश समेत कुछ राज्यों में पार्टी ने इसके लिए कई बैठक भी आयोजित की थी और बदलाव में भी इस बात को पदाधिकारियों को भली भांति समझाया जाएगा. साथ ही संगठन के मृदुभाषी और लोकप्रिय युवा नेताओं पर पार्टी आलाकमान खास तरजीह दे रहे हैं.
कई संगठन पदाधिकारियों को कैबिनेट में लाया जा सकता है और कुछ मंत्रियों को संगठन की भूमिका दी जा सकती है. इसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की फीडबैक को भी महत्व दिया जाएगा.
2027-29 के पहले विधानसभा और बाद में लोकसभा की चुनावी तैयारी को भी इस बदलाव में पूरा पूरा ध्यान रखे जाने की चर्चा है. उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य राज्यों के आगामी चुनावों को देखते हुए भी एक मजबूत टीम तैयार करना पार्टी का मकसद है. कुल मिलकर देखा जाए तो चर्चा इस बात की भी है कि यह बदलाव मोदी 3.0 सरकार के मिड-टर्म में नई ऊर्जा और जोश भरने वाला होगा.
बार बार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कह चुके हैं कि नितिन नबीन की टीम संगठन को मजबूत कर रही है, जबकि कैबिनेट में फेरबदल सुशासन और विकास एजेंडे को नई गति देने के लिए किए जाने की संभावना है. पार्टी सूत्रों का कहना है कि, मई-जून में यह फेरबदल हो सकता है.
बिहार कैबिनेट विस्तार (6 मई के आसपास) के साथ केंद्र-प्रदेश समन्वय को भी पार्टी आगे बढ़ाने का काम करेगी. एक वरिष्ठ नेता ने नाम ना लेने की शर्त पर कहा कि, "संगठन पहले, फिर सरकार. नई टीम जनता की अपेक्षाओं और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो रही है." 4 मई के बाद तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है. भाजपा नई पीढ़ी के नेतृत्व के साथ आगे बढ़ रही है.